# Gazal by Jasveer Singh Haldhar

तिमिर ने कल रात चरागों से दूरी बनाली !

अमीरों से दूर हो दिवाली हमने मनाली !!

मिल पटाखे जला रहे सारे बच्चे द्वार पर !

कुकुर ने सुन के धमाके पूंछ अपनी झुकाली  !!

रोशनी उतनी न थी जो चरागों से तय हुई !

पटाखों के धुएँ ने रोशनी शायद दबाली !!

आपने सुनी न होगी एक खबर ऐसी भी है!

भारत से डर पाक ने सैना पीछे हटाली !!

हम पड़ोसी देश का कुछ भी बुरा करते नहीं !

सरहद पर चलती हैं क्यों रोज तोपें दुनाली !!

रोज गुर्राता है हम पर खुद को शेर मानकर !

हमने जवड़े दिखाये तो क्यों आँखें छुपाली !!

हलधर “ने तो कल मिठाई बाटी फकीरों मैं !

शहीदों के नाम का दीप रख कैंडील उड़ाली !!

हलधर >9412050969

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