#Gazal by Jasveer Tanha

ग़ज़ल

 

ये सितम अब हुक़ूमत का कैसा हुआ ।

दाल आटा बहुत यार महंगा हुआ ।।

 

पास कोई ग़रीबों के जाता नही ।

खास उसके सभी जिसपे पैसा हुआ ।।

 

देखते देखते ज़िन्दगी कट गई ।

ख़ाब इक भी मुकम्मल न अपना हुआ ।।

 

हो गई है बहुत तेज़ बारिश यहाँ ।

फिर ख़फ़ा इन किनारों से दरिया हुआ ।।

 

क्यों सदाक़त की आवाज़ सुनता नही ।

आदमी लग रहा अब तो बहरा हुआ ।।

 

उड़ गये हैं परिंदे सभी बाग़ के ।

इक परिन्दा शजर पे है बैठा हुआ ।।

 

इश्क़ का हो गया आख़री फ़ैसला ।

पड़ गया  रखना दिल पास टुटा हुआ ।।

 

जो छुपी दिल में थी हो गई बात वो ।

रात फिर ख़ाब में उनसे मिलना हुआ ।।

 

हर घड़ी रहती है मुझसे नाराज़ सी ।

साथ क़िस्मत के क्या मेरा झगड़ा हुआ ।।

 

एक भी दिन ख़ुशी पास आई नही ।

ज़िन्दगी भर रहा ग़म से लड़ता हुआ ।।

 

चोट खा खा के दिल पर बहुत रोज़ ही ।

अब यहाँ उर्दू शायर ये तन्हा हुआ ।।

जसवीर तन्हा सहारनपुरी

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