#Gazal by Jitendra Kariya ‘ jeetu musafir’

ना तेरी ज़ुल्फो में खोना चाहता हु ,

ना तेरी बाहों में सोना चाहता हु ,

बस आरज़ू है एक ही इतनी मेरी,

हर जन्म में तेरा होना चाहता हु ।

 

रहकर दूर तुझसे आराम नहीं आता ,

साँसों की रवानी में तूफान नही आता ,

दिल तो धड़कता है बगैर तेरे भी,

पर तुम बिन इसे करार नही आता ।

 

हर पल के बाद साथ तेरा चाहिए दुबारा ,

सागर की हर लहर को जैसे चाहिए किनारा ,

मौसम के हर रंग से बनती है तस्वीर तेरी ,

लहू की हर बूंद में मेरी अश्क़ है तुम्हारा ।

जीतू मुसाफिर ।

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