#Gazal By Jitendra Yadav

कभी उदासी की वजह नहीं मिलती,
तो कभी ख़ुशी का सबब नहीं होता।

इतना कुछ हुआ है फ़रेब-ए-अदब में,
कि बस इश्क़ किसी से अब नहीं होता।

हाँ होती है ज़ुस्तज़ु भी इनकार नहीं इससे,
पर इज़हार कर दें ऐसा तलब नहीं होता।

माना कि हमनवा हो तुम भी ऐ हमदम मेरे,
लेकिन हमसे ये गुनाह-ए-गज़ब नहीं होता।

आखिर जुड़ें हीं क्यूँ जुदा होनें को एकदिन,
इसलिए हमसे यूँ काम बेमतलब नहीं होता।

©जितेन्द्र_यादव

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