#Gazal by Jitendra Yadav

हर दुआ है कुबूल यक़ीनन सलामती की तेरी,

आजान दुनिया को सुनाऊं ये जरूरी तो नहीं।

 

इबादतें रूह से की जाए तो जरूर मुकम्मल होती हैं,

सर सज़दे में हीं झुकाऊं ये जरूरी तो नहीं।

 

क्या हुआ जो हर लम्हां तुम्हें याद किया करता हूँ,

तुझे मैं भी याद आऊं ये जरूरी तो नहीं।

 

जिक्र नहीं करते पर फिक्र हर-पल है तुम्हारी,

तुम्हें ये अहसास दिलाऊँ ये जरूरी तो नहीं।

 

बस यूं हीं मुस्कुराती रहो ये सुकून हीं बहुत है,

साथ मैं भी मुस्कुराऊँ ये जरूरी तो नहीं।

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