#Gazal by Jitendra Yadav

हक़ीक़तें हर वक़्त हसीन कहाँ होतीं हैं

कई इल्ज़ाम है इनपे चाहतों के कुतरनें का।

 

वहम से सलामत है मुस्कान कई होठों की

कितनी इनायतें हैं इनपे ज़ख्मों के भरनें का।

 

मुझे भी भ्रम है तुम भूली नहीं होगी अभी बाकी

हमनें तो ठेका हीं ले लिया तुम्हें याद करनें का।

 

दिल भी अपनी गरज़ से सहेजता है भ्रम ताकि

शुकुन बना रहे आखिरी साँस तक मरनें का।

 

ख़्वाहिश है बेशक़ जुड़ जायें तुमसे सदा के लिए

पर ये लुत्फ़ भी कमाल है खुद के बिखरनें का।

 

सच है मोहब्बत थी, है और रहेगी हमेशा तुमसे

बस इजाज़त-ए-वक़्त नहीं इश्क़ में संवरनें का।

 

इसीलिए आज एक वादा किये देते हैं तुमसे

अपनीं हक़ीक़त से हर-रोज मुकरनें का।।

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