#Gazal by Jitendra Yadav

दूरी हो दरमियां या क़रीबी कितनें भी रहो

साँसों में ज़ेहन में प्यार का अहसाह बना रहे।

 

वो बिछड़ जाये या तुम जुदा हो जाओ उससे

मामूली हो,आम हो पर तुम्हारा खास बना रहे।

 

मोहब्बत बेहद और बेपनाह भी करो बेशक़

पर अपनी हद और अपनों का विश्वास बना रहे।

 

मेरी मानों तो मुख्तसर सी दूरी रहनें दो दरमियां

ताकि यादों की भूख और मिलन का प्यास बना रहे।

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