#Gazal by Jyoti Mishra

शाम ढलती रही , रात बढ़ती रही

मैं तुझे देख कर , बस मचलती रही

 

ओस की बूंद से होंठ नम हो गए

चांदनी रात भर फिर बरसती रही

 

आस टूटे नहीं आप रूठे नहीं

मन्नतों में दुआ रब से करती रही

 

आग सी थी लगी रूप ऐसा तिरा

बन के बिजली फ़िज़ा में चमकती रही

 

ज्योति जाए न मर आज ये सोच कर

बिन तिरे ज़िन्दगी क्यों तरसती रही

 

 

ज्योति मिश्रा

69 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *