#Gazal by Jyoti Mishra

अश्क  ऑखों से बहे तो, यूं छुपाना चाहिए

पी कर दर्द औ गम को खुलकर मुस्कुराना चाहिए  ।

 

सीख हमको दी है ये , गुलाब की मुस्कान ने

हो कंटीली राह पर ,कैसे  खिलखिलाना चाहिए  ।।

 

रात के पहलू में सिसककर तोड़ती है दम ख्वाईशें

ख्वाब बनकर अब तुम्हें ,नहीं मेरी पलकों पे आना चाहिए   ।।

 

बदगुमानी गर तुम्हें है अपनी दोस्ती पर  ए  दोस्त

सैकड़ों दफा तुम्हें फिर मुझे आजमाना चाहिए  ।।

 

तेरी चाहत, तेरी हसरत, तेरी है हर  एक सू

तेरी यादों को अब नहीं आने का बहाना चाहिए  ।।

 

लेके हसरत दीदार की , कहीं खाक में मिल जाऊं न

जल रही सदियों से  “ज्योति” , अब तो बुझाना चाहिए

 

ज्योति मिश्रा

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