#Gazal by Jyoti Mishra

 

वो खयालों में इस कदर  आते हैं

भरी बरसात की तरह  ऑखों से बरस जाते हैं

 

जर्रे -जर्रे पे होती है निशानी  उनकी

दूर जाकर भी हर बार, ठहर जाते हैं

 

बेबसी इस दिल की क्या कहिये

दिल में जो काबिज़ हैं, उन्हीं से राज़ छुपाते हैं

 

कैसे कह दें के रह नहीं सकते तुम बिन

नजरें झुक जाती हैं और लफ्ज़ शर्माते हैं

 

जान सके वो न पर जाने है सारा जमाना

गुज़रे उनकी गली से, तो हम भी महक जाते हैं

 

दिल की बातों का होता है, दिल से रस्ता

सोचकर बस यही हम दिल को बहलाते हैं

 

आवारा बादल की तरह मदमस्त है तबियत उनकी

भीग कर बारिशों में हम भी बहक जाते हैं —  ज्योति मिश्रा🔥 पटना

261 Total Views 6 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *