#Gazal by Kamlesh Joshi , Kankroli

*जाने क्या सोच के *

 

कोई रेंगता जमीं पे किसी को चलाता है

जाने क्या सोच के तू किसी को बनाता है …

 

सतरंगी दुनिया सुनहरी देखता हर कोई

एक रंग ही सदा तू किसी को दिखाता है …

 

भागता फिरता कोई फुरसत नहीं काम से

खाली पेट ही कैसे तू किसी को सुलाता है …

 

लकीरों मे कहां छिपी है तकदीरें बताना

कांटे कहीं, फूलों से किसी को सजाता है ….

 

रहमत तेरी किस किस पर है क्या पता

दौलत अपनी सब तू किसी को लूटाता है ….

 

हर कोई चला है मंजिल की और ‘कमल’

किसी को रोकता तू किसी को बढाता है ….

 

……कमलेश जोशी कांकरोली राजस्थान

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