#Gazal by Kamlesh Srivastava

ग़ज़ल मेरे संग्रह “वक़्त के सैलाब में ”      से

 

मुस्कुराने से फ़ायदा क्या है ।

ग़म छुपाने से फ़ायदा क्या है ।

 

फूल ख़ुशियों के गर खिलें, पी लो ।

लड़खड़ाने से फ़ायदा क्या है ।

 

तुम नसीबों के पार बैठे हो ।

याद आने से फ़ायदा क्या है ।

 

सख़्त पत्थर की मूरती है वो ।

सर झुकाने से फ़ायदा क्या है ।

 

कौन अपना है जो मना लेगा ।

रूठ जाने से फ़ायदा क्या है ।

 

दिल की दुनिया ही बस न पाई तो ।

घर बसाने से फ़ायदा क्या है ।

 

एक पिंजरा है ज़िन्दगी अपनी ।

फड़फड़ाने से फ़ायदा क्या है ।

 

कमलेश श्रीवास्तव ।

094250 84542

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