#Gazal by Karan Bahadur Sahar

रुक अभी ये इश्क होना बाकी है,

अश्क के मोती पिरोना बाकी है।।

 

मैने पाया था तेरे जिस कतरे को,

धीरे-धीरे सब को खोना बाकी है।।

 

जितनी शिद्दत से मुहब्बत की मैने,

उतनी शिद्दत से ही रोना बाकी है।।

 

मेरी ग़ज़लें भी मुकम्मल हो गई,

बस आखिरी लफ़्ज़ों का होना बाकी है।।

 

खो गए हैं हम तेरी चाहत में अब,

बस वफ़ा का बीज बोना बाकी है।।

 

क्यों “सहर” क्या हुआ कुछ तो कहो,

क्यों कहा तुमने कि रोना बाकी है।।

 

करन “सहर”

 

171 Total Views 6 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *