#Gazal by Karan Sahar

ताउम्र मुझे इक भूल सी लगी,

तुम्हारी ये दोस्ती धूल सी लगी ।।

 

मैं हर मुलाकात में इश्क़ जताता,

और तुम्हे ये बात फ़िज़ूल सी लगी ।।

 

काँटों से गुज़रा तो दुआएं मांगी,

तुम्हारी बद्दुआ भी मुझे फूल सी लगी।।

 

कल फिर से आँसू गिराने तो चाहे,

मगर कल ये आँखें मशगूल सी लगीं ।।

सहर

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