#Gazal by Karan Sahar

हम तेरे ही शहर में, बसा लें घर अपना,

ऐ मौत तेरे दर पे, झुका लें सर अपना ।।

 

क्या हम को भी इंसाफ देगा ऐ समंदर,

तेरे साहिल को आशिक, बना लें गर अपना ।।

 

अब तेरे चले जाने के बाद ऐ ग़ज़ल,

तेरी तस्वीर से ही , सजा लें घर अपना ।।

 

 

अब किसी शाख से उतनी बनती नहीं मेरी,

सोचते हैं कि अब उगा लें शजर अपना ।।

 

तुम मेरे दिल मे जहां से दाखिल हुए थे,

उसी हिस्से को अब हम बना लें दर अपना ।।

 

-सहर

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