#Gazal by Karan Sahar

सभी मशक्कत में थे

कि मुहब्बत की जाए,

और मैंने अपने रक़ीबों के यहाँ

एक गुलदस्ता भिजवा दिया ।।

 

सभी को शिकायत सी थी

अपने आईने की बू से,

और मुझे जब भी वक्त मिला

अपने आईने को नहला दिया ।।

 

सभी के हिस्से में ये इश्क़

बारी बारी से आया था,

और मेरी बारी क्या आई

ये इश्क़ ही शरमा दिया ।।

 

सभी तो इसी सोच में थे

कि जल्दी से मंज़िल मिल जाए,

और मैंने तेरी एक गली को

हज़ारों बार तो दोहरा दिया ।।

 

सभी को मुफ्त में खुशबू

और सस्ते में खुशियाँ बांटी हैं,

और मैंने जब मांगा

तो उसने हर रंग महँगा दिया ।।

करन_सहर

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