#Gazal by Karan Sahar

पतंगों में लटकती डोरी सा हूँ,

पेचे लड़वाती हैं तेरी उंगलियाँ मुझ से ।

 

सिर्फ रोता ही नहीं वो बहुत रोता है,

आधी बातें छुपाती हैं तेरी चुगलियाँ मुझ से ।

 

#करन_सहर

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