#Gazal by Karan Sahar

मेरी सिसकियों को अक्सर राग में बदल देती है,

मेरी ग़ज़लें मेरे आँसुओं को आग में बदल देती हैं ।।

 

तुम्हारी तन्हाई तो बुझा देती होंगीं तुम्हें भी,

मेरी तन्हाई को तो ये जलते चिराग में बदल देती है ।।

 

ज़िंदगी हमेशा करेले सी कड़वाहट परोसा करती है,

ये तो मेरी ग़ज़लें हैं जो इन्हें भी साग में बदल देती हैं ।।

 

#करन_सहर

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