#Gazal by Karan Sahar

उम्र जब हल्के से गुजरने लगी

तो सोचा कि कोई बोझा ले लूँ,

उन्हीं दिनों मैं प्यार में पड़ गया

और आज तक मेरी साँस भारी है ।।

 

जीने को तो चार पल काफी थे

पर मैंने इक पल मर के भी देखा है,

अब शायद तेरे साथ का वो इक पल

आज भी मेरे सिर पर उधारी है ।।

 

#करन_सहर

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