#Gazal by Karan Sahar

तुम्हारे ज़ुल्फ़ की सूरत कुछ ऐसे मुड़ी सी है,

कि जैसे टहनी पर गुलाब की पंखुड़ी सी है ।।

 

आज कल एक झपकी में ये रात गुज़र जाए,

कि इस कदर मेरी ये निंदिया उड़ी सी है ।।

 

हर्फ़ दर हर्फ़ तेरी तस्वीर उभर रही है सीने में,

शायद मेरी ही एक लम्स तुझसे जुड़ी सी है ।।

 

मेरे और मेरी कलम के चर्चे है इस तरह,

कि मैं सिंपल सा इक मुंडा, वो सोहणी कुड़ी सी है ।।

 

लम्स : एहसास

 

#करन_सहर

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