#Gazal by Karan Sahar

आदतें अपनी भी वैसे तो कुछ खास नहीं है,

चाहते उसी को हैं जो हमारे पास नहीं है ।।

 

तुम्हारे चले जाने का बस इतना असर हुआ है,

कि दिल मे दर्द है, लेकिन ये दिल उदास नहीं है ।।

 

जब से महकते गुलाब को छुआ है मैंने,

मेरी ख़ुशबू को तबसे होश-ओ-हवास नही है ।।

 

मैं जब भी मोतियाँ सजाऊँ, वो बिखेर देती हैं,

शायद मेरी आँखों को ये सब रास नहीं है ।।

 

ये चाँद जो रात भर जलता रहता है,

हमारा हमसफर है शायद पर ये दास नहीं है ।।

 

#करन_सहर

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