#Gazal by Karan Sahar

पलट कर देख तो सही क्या क्या गँवाया है मैंने,
तू जितना देख सके, उतना ही दिखाया है मैंने ।

कहीं ये शहर डूब न जाए आँसूओं के समंदर में,
इसलिए अपने किस्सों को सब से छुपाया है मैंने ।

ये बिखर जाते तो मौसम का नुकसान हो जाता,
इसलिए ज़ख्मों को दिल मे ही दबाया है मैंने ।।

#करन_सहर

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