#Gazal by Karan Sahar

दिल के बाजार में ऐसे तो ख़रीदार बहुत हैं,
पर जो अपने हैं वो इस बख़त बीमार बहुत हैं ।

इस बरस किस की मुहब्बत का मज़ा चक्खूं,
तितलियाँ हम पे भी मरने को तैयार बहुत हैं ।

मुझसे भूल कर भी दुश्मनी की बात मत करना ।
मेरी मुट्ठी में भी चाकू छुरी और तलवार बहुत हैं।।

कट गया ये मेरा दिन, ज़ख़्मी हो गईं रातें,
सच ही है कि तेरी यादों में भी धार बहुत हैं ।।

यहाँ कीमत नहीं मिलती तो कहीं और चलते हैं,
ज़माने में मुहब्बत वालों के बाजार बहुत हैं ।।

“सहर” हर रोज़ तेरी बेवफ़ाई के चर्चे नहीं करता,
मुझे अपनी वफ़ा समझाने को इतवार बहुत हैं।

#करन_सहर

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