#Gazal by Karan Sahar

अब और किस से इतनी मुहब्बत होगी,
तू नहीं तो इस दिल में तेरी चाहत होगी ।।

तू किसी रूह में बस जा ऐ मुहब्बत,
बाद मुद्दत भी वहाँ तेरी हिफाज़त होगी ।।

जब जब मैं घायल परिंदा हो जाऊँगा ना,
सिर्फ तेरी, हाँ हाँ सिर्फ तेरी ज़रूरत होगी ।।

बस एक बार आ कर मिल तो ले मुझ से,
फिर कह लेना, जितनी भी शिकायत होगी ।।

मैं अब भी तुझे उतना ही चाहता हूँ लेकिन,
मैं जानता हूँ, तुझे तो मुझसे नफरत होगी ।।

सोचता हूँ, दिल को यहाँ से आज़ाद कर दूँ,
पर करूँगा तभी, जब तेरी इजाज़त होगी ।

सुना है कि मेरे इश्क़ के किस्से छपने लगे है,
ये ज़रूर मेरे अपने दुश्मनों की हरकत होगी ।

मेरी तमन्ना तो बस तुम और बस तुम ही हो,
पर छोड़ो ना, तुम्हारी भी तो कोई हसरत होगी ।

मुद्दत से मैंने दिल का दरवाजा नहीं खोला,
दरीचा खड़के तो सोचूँ ये नई मुसीबत होगी ।।

इसे सुन कर मेरा बदन थरथराने क्यों लगा,
हो ना हो इस बात में कोई हकीकत होगी ।।

पहले इस दिल से खेला, फिर इसे तोड़ दिया,
लगता है ये किसी अपने की शरारत होगी ।।

माँ की ममता का असर इतना है कि,
माँ दुआ देगी तो घर मे बरकत होगी।

तेरे दिल के किसी किनारे में पड़ा रहना,
बस यही मेरी आख़िरी चाहत होगी ।

#करन_सहर

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