#Gazal by Karan SWahar

जम गया क्यों है ये आँसू, उतर क्यों नहीं जाता,
दिल ने धड़कना ही नहीं तो ये मर क्यों नहीं जाता ।

कितनी कोशिश करूँ, थक गया हूँ करते करते
अब जो मेरा ही नहीं है वो मुझ से उतर क्यों नहीं जाता ।।

लाख ज़ेवर लगाने की क्या ज़रूरत थी इस को,
अपना ईमान ही तो है खुद से संवर क्यों नहीं जाता ।

इतना कुछ सह चुका एक दफा मुहब्बत कर के,
हार जाता है दिल, इश्क़ से भर क्यों नहीं जाता ।।

उसके अपने इस शहर में नहीं रहते हैं शायद,
सब चले जाते हैं घर, लेकिन वो घर क्यों नहीं जाता ।।

अब क्या सज़ा-ए-मौत ले कर ही मानेगा “सहर”,
इतने लोगों का दिल तोड़ा है,तू सुधर क्यों नहीं जाता ।।

#करन_सहर

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