#Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan

खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई नई है..

अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ्तगू में, अभी मुहब्बत नई नई है..

 

अभी ना आएगी नींद हमको, अभी ना हमको सुकून मिलेगा,

अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी ये चाहत नई नई है..

 

बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएं..

फज़ा में खुशबू नई नई है, गुलों में रंगत नई नई है..

 

जो खानदानी रईस हैं वो, मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना..

तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है..

 

ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा, के आ के बैठे हो पहली सफ़ में..

अभी से उड़ने लगे हवा में, अभी तो शोहरत नई नई है..

 

बमो की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं..

गुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिसकी ताक़त नई नई है..!!

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