#Gazal by Kaushal Kishor Srivastava

आपकी तारीफ का हर लफ्ज़ खंजर हो गया

खाद इतनी डाल दी कि खेत बंजर हो गया

एक के दो किये टुकडे उनके टुकड़े कर दिए

देखिए चारों तरफ टुकड़ों का मंजर हो गया

तंदुरुस्ती बनी जिससे वह तो खेतों में उगा

उगाने  वाला उसे पर अस्थि पंजर हो गया

आपने बस प्रेम की लहरें गिनी है बैठकर

जिसने देखा डूब कर वह एक कलंदर हो गया

दुनिया ने चाहा पकड़ना कब्र तक जाते हुए

हाथ जिसने खुले रखे वह सिकंदर हो गया

किनारे से जो बंधी वह नदी बनकर रह गई

जिसने तोड़े किनारे वह एक समंदर हो गया

कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 विष्णु नगर परासिया मार्ग

छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश

मोबाइल 9424636145

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