#Gazal by Kavi Rajesh Purohit

अब लबों पर इश्क के तराने नहीं आते।

लाख खुदाई करो मगर खजाने नहीं आते।।

 

घुटन रह रह कर सारे किस्से बयां करती।

अब नकली चेहरे हमें छुपाने नहीं आते।।

 

घर के बुजुर्गों को चैन से जी लेने दीजिये।

अब शहरों में वो दिन बिताने नहीं आते।।

 

मतलबपरस्ती में लोग आग लगा रहे ।

नफरत की आग कोई बुझाने नहीं आते।।

 

दीवानों की बस्ती है यहाँ कौन फिक्र करे।

पतितों को कोई यहाँ उठाने नहीं आते।।

 

जरूरतमंद की मदद की ताउम्र जिसने।

“पुरोहित” दिल को वो दुखाने नहीं आते।।

 

98,पुरोहित कुटी ,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी, जिला-झालावाड़, राजस्थान।

पिन-326502

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