#Gazal by Kavi Sharad Ajmera Vakil

इश्क के इम्तिहान बाकी हैं !

दिल के अरमान बाकी हैं !!

 

लगा जो तीर तेरे हुस्न का  ।

अधमरे हैं कुछ जान बाकी है ।।

 

खुशबू की तरह हर सांस में ।

घुले हो पर पहचान बाकी है ।।

 

चोट लगी है दिल पर मेरे ।

सूखे आंसू मुस्कान बाकी है ।।

 

शुक्र है कुछ कहा तो सही ।

आंखे बोली जवान बाकी है ।।

 

सबक वफादारी निभाने का ।

जानवर सीखे इंसान बाकी है ।।

 

बेईमानी की राह से बुलंदी पर ।

चतुर निकले नादान बाकी है ।।

 

कवि शरद अजमेरा “”वकील””

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