#Gazal by Kavi Sharad Ajmera Vakil

गलत फहमी पडोसी को मुलाकात ज़रूरी है !

फिर  भी  ना  माने  तो मुक्का लात ज़रूरी है !!

 

हम   हमेशा चाहते प्यार से मिटे गलतफहमी !

इसीलिये  समझाते  क्योकि  बात  ज़रूरी है !!

 

चोर डाकु  कंहा  समझेंगे शराफत की भाषा !

उनको  तो  सरकारी  हवालात  ही जरूरी है !!

 

प्यार कभी हो नहीं सकता जिस्मो से बातो से !

उसके  लिये  तो  दिल में  जजबात जरूरी है !!

 

गमों का समन्दर लहराता हो जिनके दिलो में !

रोके नहीं हो जाने दे आँखो से बरसात जरूरी है !!

 

बेफिक्री  की  सड़क पर हवा में रात काट लेंगे !

क्या करे मगर ख्वाबों के लिये  रात जरूरी है !!

 

*** “वकील”**

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