#Gazal by Kavi Sharad Ajmera , Vakil

घरों की कलह खत्म हो खुशहाली छा जाऐगी.

तुम्हारे गुलशन में गुलों की बहार आ जाऐगी..

 

जिंदगी में खुशियाँ  तुम्हें  सब  मिलने लगेगी.

ख्वाहिश जो भी रह गई है वो पूरी हो जाएगी..

 

ताबीज मैं एसा दूँगा तुम्हें  पढ़ कर मेरे दोस्त .

ना तुम रूठोगे ना पत्नी तुम्हारी रूठ पाऐगी..

 

याद रखेगी ये दुनिया मेरा नाम भी “वकील” है.

दूँगा वो चीज मै तुम्हें तुम्हारी मौज हो जाएगी..

 

मिसाले देंगे लोग मेरी जो मुझे पहचानते नहीं.

ये ताबीज तुम्हें ऐसी बुलंदी पर ले जाऐगी..

 

गर लेना चाहो तो मुफ्त में मिलेगा सिर्फ आज.

कुछ शर्त मेरी मानने पर ये तुम्हें दे दी जाएगी..

 

ताउम्र ना बोला हो झूठ पति पत्नी ने आपस में .

ये ताबीज उसी घर में बरकत अपनी दिखाऐगी..

 

मुझे तो ऐसा जोड़ा आजतक नहीं मिल पाया.

किसी को मालूम हो vpp से पहुँचाई जाऐगी..

 

“”वकील””

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