#Gazal by Kavi Sharad Ajmera Vakil

गजल “”माँ””

 

वो जब  भी करीब आती है .

मेरा सोया नसीब जगाती है ..

 

कब कैसे कट जाती रात मेरी.

लौरी गा गा कर जब सुलाती है..

 

खुद भूखी रह आखिरी में खाती.

पहली रोटी मुझे खिलाती है..

 

मैं खोया रहता सपनों में देर तक.

वो सबसे पहले उठ जाती है ..

 

मुफलिसी क्या मुझे पता नहीं.

राजा बेटा मुझे बुलाती है..

 

मेरी खुशियों पर हो निसार वो .

दर्द मुस्कुरा कर छुपाती है ..

 

हार मान लेगा रब भी “”वकील””

“”माँ”” जब अपनी पर आती है..

 

***””वकील””

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