#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

ख्वाबों में ख्यालों में तुम ही तुम

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हमें अपने दिल से शिकायत न होती

मर जाते गर तुमसे चाहत न होती

 

जिंदगी   बना   बैठे है  तुमको

मिलते गर तुम नही राहत न होती

 

सुकून करार भी नही होता गर

रब   की   इबादत   न होती

 

दिल तुमसे लगा भी तो नही पाते

गर   तुम्हारी  इजाजत  न होती

 

बेरंग   बेनूर  होती ये  जिंदगी

नजरें करम  इनायत न  होती

 

ख्वाबो में ख्यालों में तुम ही तुम

तुम न होते तो मुझमे ताकत न होती

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

स्वरचित

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