#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

सोचता हूँ तुम्हारा पैगाम आना चाहिए

तुम्हारे लबों पर मेरा भी नाम आना चाहिए

 

निसार दूं जान अपनी यकीन कर

मेरी जिंदगी तुम्हारे काम आना चाहिए

 

तुम हो और मैं हूँ गुफ्तगू कहीं पर

एक ऐसी हसीन शाम आना चाहिए

 

सोचता हूँ अपने सारे सपने बेच दूं

लेकिन उचित दाम आना  चाहिए

 

जीत लूं सब बाजियां दुआ कर हमनशीं

मेरे हिस्से में भी ईनाम आना चाहिए

 

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट

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