#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

दूर तुमसे रहे तो बिखरने लगे हैं
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दूर तुमसे रहे तो बिखरने लगे हैं
जीते जी जैसे हम तो मरने लगे हैं

तन्हा कटता नही सफर जिंदगी का
तन्हाई से जैसे हम डरने लगे हैं

कोई साथी तो हो जो पुकारे हमें
दर्द के मारे हम तड़पने लगे हैं

दर्द ही दर्द है ,ना मेरा हमदर्द है कोई
विरह की आग में हम जलने लगे हैं

खो गया मेरे दिल का चैनों सुकून
रात भर हम करवट बदलने लगे हैं

-किशोर छिपेश्वर”सागर”
भटेरा चौकी बालाघाट
(मध्य-प्रदेश)

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