#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

बहुत आदत है मुस्कुराने की
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नजर लग न जाये जमाने की
बहुत आदत है  मुस्कुराने की
करते हो तो  इजहार  भी  करों
बात अच्छी नहीं इश्क छुपाने की
इक तेरे  दीदार को तरसता रहा
क्या  जरूरत  नजरें  झुकाने  की
शोखी ये शरारत ये बाँकपन तेरा
अदा खूबसूरत तेरी है लुभाने की
मिलो दो पल तो गुजार लें साथ तेरे
रुत आ गई दस्ताने दिल सुनाने की
तुझे ही तो सोचता रहता है”सागर”
सोच रखा है तुझसे रिश्ता बनाने की
-किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

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