#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

साथी कोई वफादार नहीं मिलता
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मेरा हमदम मेरा यार नहीं मिलता
  सच्ची चाहत दिलदार नहीं मिलता
रूठी सी फिजा,उजड़ा गुलशन
  फिजा रंगीन मौसम बहार नहीं मिलता
नमीं आँखों रहने लगी है अक्सर
   बेचैन मेरे दिल को करार नहीं मिलता
दर्द ही दर्द मिलते रहे मोहब्बत में यारों
   किसी पर भी ऐतबार नहीं मिलता
बिखर गये अहसास भी अब “सागर”
  वफ़ा नहीं साथी कोई वफादार नहीं मिलता
-किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट (मध्य-प्रदेश)

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