#Gazal by Krishan Kumar Tiwari Neerav

तस्वीर को जिगर में बसाया ही क्यों गया,

गम को गले से इतना लगाया ही क्यों गया ।

चिढ़ हो रही है खुद ही सियासत के नाम से,

दल बदलुओं को इतना लड़ाया ही क्यों गया।

अहले वतन के वास्ते कुछ भी नहीं बचा,

सड़कों पे इतना खून बहाया ही क्यों गया ।

यह जानते हुये भी बिछड़ना है एक दिन,

छुप छुप के इतना प्यार जताया ही क्यों गया।

अफसर के सामने वहां कोई नहीं बोला ,

आखिर में बहुत शोर मचाया ही क्यों गया ।

सब सूख गये एक भी पौधा नहीं बचा,

गमले में इतना फूल लगाया ही क्यों गया ।

डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

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