#Gazal by Krishan Kumar Tiwari Neerav

अपने ऊपर मैं हंसना नहीं चाहता,

राज दिल का मैं कहना नहीं चाहता ।

जानकर मुंह का पतला है जो आदमी ,

उसके मुंह व्यर्थ लगना नहीं चाहता ।

अपनी कक्षा में जब से मैं पकड़ा गया ,

खत किताबों में रखना नहीं चाहता ।

जो गरीबों की फरियाद सुनता नहीं ,

उसके सिजदे में रहना नहीं चाहता।

अपनी कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया ,

इससे ज्यादा मैं झुकना नहीं चाहता ।

अपने पैरों में ही बाझकर गिर पड़ूँ,

होड़ ऐसी मैं करना नहीं चाहता।

बिंब शीशे में बसता है जिस रुप में,

टिप्पणी उसपे करना नहीं चाहता।

डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

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