#Gazal by Kumar Vijay Rahi

दश्त में रात बडी होती है।

और बरसात बडी होती है।

तुम सभी जानते हो सच इसका,

आदमी जात बडी होती है।

आंखे’ से आंखे’ करे बाते जब,

वो मुलाकात बडी होती है।

कोई’ सानी है’ नही दुनियां में,

मां की ‘ हर बात बडी होती है।

सोच लेना इसे करने वालो,

इश्क मे मात बडी होती है।

जिसने’ खाई वो’ सुधर जाता है,

वक्त की लात बडी होती है।

#कुमार_विजय

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