#Gazal by Meghvrat Arya

हवा में उसकी जो लहरा गयीं जुल्फें,
दिन को स्याह रात बना गयीं जुल्फें।

चाँद भी बादलों में जा छुपा है,
जैसे ही चेहरे पर उसके आ गयीं जुल्फें।

बालों को खुला छोड़ जो वो घर से निकली,
सारा शहर महका गयीं जुल्फें।

हवा का झोंका बालों को बिखरा गया उसके,
लहरती, लचकती बल खा गयीं जुल्फें।

दोनो हाथ उठाकर जो उसने बाल बाँधे,
जमीं पर ज़न्नत दिखा गयीं जुल्फें।

ज्यों ही उंगलियों से बालों को कानों के पीछे किया उसने,
फिर होठों से उसके टकरा गयीं जुल्फें।

– Meghvrat_Arya

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