#Gazal by Naaz Ozair

कारे हैवान करो मैं तुम्हे इंसान कहूँ,
जानते बूझते शैतान को भगवान कहूँ ।

धर्म के नाम पर दुनियाँ में जो बहता है लहू,
सिख,ईसाई उसे हिंदू, या मुसलमान कहूँ ।

बाद मरने के भी आराम नहीं देती है ,
तुझको किस मुँह से मेरी जिंदगी आसान कहूँ।

जोर टूटा भी कभी उसका तो कमजोरों पर,
ऐसे नामर्द को मैं कैसे पहलवान कहूँ ।

ऐ मेरे नाज़ बस इतनी सी इजाजत दे-दे,
दिल की ख्वाहिश है कि दिल का तुझे मेहमान कहूँ।

नाज़ ओजैर नाज़

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