#Gazal by Naaz Ozair

आईना ए जनाब मेरे साथ- साथ है ,
हर बात का जवाब मेरे साथ -साथ है।

कैसे मैं मान लूँ की नहीं रूत बहार की,
खिलता हुआ गुलाब मेरे साथ -साथ है ।

गलियों के नौजवानों की तो ईद हो गई,
एक हुस्न बेहीजाब मेरे साथ -साथ है ।

तेरा हजार शुक्रिया एे रीश्वतों का दौर,
अल्लामा का खिताब मेरे साथ -साथ है।

फाका-कशी है नाज़ जो घर में तो क्या हुआ,
बोतल भरी शराब मेरे साथ- साथ है ।

नाज़ ओजैर

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