#Gazal by Neetu Rathor

हो ज़मी पे आज तो श्रृंगार कर
खोल खिड़की चाँद का दीदार कर।

रात रोशन हो चेहरे के नूर से
दिल में बिठा नज़र से प्यार कर।

हर हकीक़त सामने तेरे ब-हिल्म
हो मुहब्बत तो ज़रा इज़हार कर।

सेज़ फ़ूलो की कभी सजती जहाँ
जिंदगी जाती वहाँ भी हार कर।

चाँद-सूरज साथ चलते गर कभी
हम उन्हें भी बुलाते पुकार कर।

चाह के हर रास्ते दिन-रात में है
खुद सम्भलना न ठोकर मार कर।

जो शख़्स जिए “नीतू” का क़िरदार बन
घर उन्ही के उजाला हर बार कर।
नीतु राठौर

Leave a Reply

Your email address will not be published.