#Gazal by Nitesh Sagar

तू अगर मिल जाए तो क्या बात है
इससे बढ़कर और क्या सौगात है

मुश्किलों से डर मुझे क्यूँ हो भला
मां का मेरे सर पे जबतक हाथ है

आँख वालों को जहां मे क्या है गम
आईना भी आज उनके साथ है

रातभर मेरे नयन बहते रहे
जाने ये किस दर्द की बरसात है

अब किसी दुजें को मै दुगाँ नहीं
दिल है मेरा न की ये खैरात है

छोड़ दो कुर्सियां नेताजी अब
देश के बिगड़ें हुए हालात है

कह रहा “सागर” उठा तलवार अब
चील-कौवों की यहाँ जअमात है

नितेश सागर
बेरमो, बोकारो

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