#Gazal By Nitesh Sagar

रफ़्ता रफ़्ता जीने का हुनर आया
तेरा चेहरा जब मुझे नज़र आया

महकी महकी फ़िजा हुई दिलबर
मुझसे मिलने तू जब शहर आया

बदला बदला लगे यूं हुस्न मेरा
जब कभी दिल में तू उतर आया

सहमी सहमी सी है धड़कन मेरी
सौतके घर से जो तू गुजर आया

मचली मचली सी दिखी ‘सरिता’
‘सागर’ से मिलने का पहर आया

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