#Gazal by Piyush Gupta

ग़ज़ल

आँसू को पी पीकर हँसना,कितना मुश्किल होता है
दीप सा खुद को जलते रखना, कितना मुश्किल होता है

पत्थर को भगवान बताना ,है आसान बहुत जग में
पर भगवन को पत्थर कहना,कितना मुश्किल होता है

मालूम नही हो गहराई ,और आगे भी जाना हो
तब यूँ पार नदी को करना , कितना मुश्किल होता है

तुम तो सुख ही सुख जीते हो,शीतलता मे रहते हो
मुझसे पूछो धूप मे तपना,कितना मुश्किल होता है

जिसने सब खैरात मे पाया, पूछ रहे हो उससे क्या
मुझसे पूछो मेहनत करना,कितना मुश्किल होता है

इतने दुःख जीवन में पाकर, मुझको ये मालूम हुआ
अपनी ही तकदीर से लड़ना,कितना मुश्किल होता है

तुझको खोकर मैंने समझा, इस मतलब की दुनिया में
तेरे जैसे यार का मिलना कितना मुश्किल होता है

आँखो मे आँसू भर भरकर,घर वालो से छिप छिपकर
तेरी खातिर चिट्ठी लिखना,कितना मुश्किल होता है

तुम नदियों से जाकर पूछो, खारे एक समुन्दर को
अपने जैसा मीठा करना,कितना मुश्किल होता है

अपने गम को सह लेता है,हर कोई इस दुनिया में
पर दूजे के गम को सहना कितना मुश्किल होता है

जीवन के इस मोड़ पे आकर, मुझको ये अहसास हुआ
बीते वक्त से वापस मिलना, कितना मुश्किल होता है

पीयूष गुप्ता ‛गगन’
7275913697

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