#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★

तितलियाँ आवारगी में आज हैं।
पर नहीं फिर भी कहें परवाज़ हैं।
कुछ दफ़न से हो गये हैं राज अब
ये सियासत है बड़े से राज हैं।
अलहदा बातें नुमाइस की हुई
फतह करने के अलग अंदाज़ हैं।
तफ़्सरे में बात निकली है मियां
माल खा कर हो गये नासाज़ हैं।
वो हिमायत यूँ करेंगे दर असल
शोर ये सरकार की आवाज़ हैं।
आसमानी हो गये सरकार अब
आहटें हैं कोढ़ में वो खाज़ हैं।
“ध्रुव” नहीं आसां बगावत हो सके
सख़्त पहरे में परिन्दे आज हैं।

★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली,भोपाल
मध्यप्रदेश,

Leave a Reply

Your email address will not be published.