#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल……………..

बह्र/अर्कान-1222×4,मुफाईलुन×4

 

ग़नीमत है अभी तक वो उठाया ना गया होगा।

नहीं मालूम हो जाता निभाया ना गया होगा।

 

 

हजारों रोज़ भरते सिसकियां हैं जो यतीमों से

कहेगा कौन महफिल में भुलाया ना गया होगा।

 

 

नही महफ़ूज़ वो अब तक अदालत के जमाने मे

ठिकाना मुस्तक़िल उसको दिलाया ना गया होगा।

 

 

सियासत की अदावत से नहीं वाकिफ यकीनन वो

सियासत के झमेले जो सिखाया ना गया होगा।

 

 

चला किस्मत भरोसे  ज़िन्दगी किल्लत भरी लेकिन

अदाकारी न चल पाये बताया ना गया होगा।

 

 

न इंसां की ख़बर उनको न रहमत “ध्रुव”यतीमो पे

यकीनन आइना उनको दिखाया ना गया होगा।

शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली भोपाल

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