#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

मसाइल भी न सुलझेंगे कभी उलझन की बातो से।

कटेंगे रात दिन सदियाँ वो सुलझेंगे सौगातों से।

 

 

न कोई गैरवाजिब तफ़्सरे हों बस अमन की बात

खुले दिल से करें अब खैरमकदम अपने हाँथो से।

 

 

तरक्की दीजिये सबको न वोटो के लिए शाजिश

इक हिन्दुस्तानी हो मज़हव न होगा कुछ बिसातों से।

 

 

बड़ी ओछी हुई बातें कत्ल हो हमवतन का जब

बनायें देश को सब मिल न कुछ होना है घातों से।

 

 

रहे कानून सबके वास्ते दौर ए तरक्की हो

अमन चाहें मुसाफ़िर लेना क्या दिन और रातों से।

 

मगसम/

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